India Pakistan Border

ऐसा लगता है कि नवंबर के महीने भारत-पाक संबंधों में तनाव का नया अध्याय खोलने का महीना है। पहले भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मलेशिया में आयोजित होने वाले आसियान बैठक के दौरान अपनी अमेरिकी समकक्ष एश्टन कार्टर से मुलाकात की और अब 15 नवंबर को पाक सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ अमेरिका की यात्रा करेंगे।

मनोहर पर्रिकर और एश्टन की बैठक में तय हुआ है कि अगले महीने वाशिंगटन में द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा होगी और भारत अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग पर चर्चा की जाएगी। दूसरी ओर, पाक सेनाध्यक्ष अपने पांच दिवसीय यात्रा के दौरान अमेरिका के सरकारी और सैन्य अधिकारियों से मिलेंगे और सुरक्षा मुद्दों विशेषकर अफगानिस्तान के विषय पर चर्चा करेंगे। राहील शरीफ का यह दौरा पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के अमेरिका के विफल दौरे के बाद होगी जबकि इस यात्रा से उम्मीद की जा रही थी कि अमेरिका पाकिस्तान के संबंधों में सुधार आएगी।

भारत पाक तनाव कश्मीर मुद्दे से शुरू होता है जो सीमा संघर्ष से होता हुआ अफगानिस्तान के विषय पर समाप्त होता है। मगर इन तनावपूर्ण स्थितियों में जो बात सबसे अधिक महत्व रखती है वह यह है कि दोनों पक्ष अनावश्यक खर्च कर रहे हैं। उनमें से एक अनावश्यक खर्च, दोनों पक्षों के विभिन्न देशों से सैन्य उपकरणों का खरीदना है कि जिसमें अमेरिका प्रथमिकता रखता है।

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2014 में अमेरिका से हथियार खरीदने वालों में भारत दूसरे स्थान पर रहा है। इसी तरह पाकिस्तान को भी अमेरिकी हथियारों की खरीद की वजह से बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। पाकिस्तान कभी इसकी कीमत कुछ मुद्दों में अमेरिका के साथ सहयोग करके चुकाता है और कभी पाकिस्तानी समाज में अमेरिका की सांस्कृतिक आक्रमण (इशारा पाकिस्तान में सक्रिय अमेरिकी शैक्षिक व कल्याणकारी संस्थाओं की ओर) से मौन करके।

भारत-पाक तनाव में अब तक केवल एक देश की जीत हुई है और वह अमेरिका के अलावा अन्य कोई नहीं है। इन दोनों देशों के तनावपूर्ण स्थितियों का सीधा फायदा केवल अमेरिका को पहुंचता है। इसलिए जरूरी है कि द्विपक्षीय वार्ता जारी रखा जाए ताकि कभी खत्म न होने वाले इस तनाव में कुछ कमी आए और इन दोनों देशों की पूंजी अनावश्यक खर्च के अभिशाप से सुरक्षित रह सके।