हुज्जत रज़ा: भारत माता की जय न बोलने वालों पर भले ही तीखे बयान आये हों लेकिन योग गुरु बाबा रामदेव तो हद ही कर गए और सर काटने तक की बात कर दी। वहीँ बीजेपी नेता गिरिराज सिंह भी देश से निकालने की बात कह चुके हैं लेकिन बीजेपी ने इस पर चुप्पी साधते हुए कहीं न कहीं समर्थन ज़ाहिर किया।

सवाल यह है की क्या अब अपने विचारों को रखने की स्वतंत्रता पर भी दो तरह के कानून हो गए है? क्या मार्च में खत्म हुए सांसद सत्र में अरुण जेटली के बयान "भड़काऊ भाषण अभिवक्ति की आज़ादी के श्रेणी में नहीं" को अलग तरह से देखा जाए? क्या कन्हैया कुमार, उमर खालिद के लिए कानून कड़क है और बाबा रामदेव पर नरम?

बीजेपी नेताओं की माने तो अगर आप कुछ वाक्य जो वह चाहते हैं नहीं बोलेंगे तो या आपको देश से निकाला जाएगा या फिर बाबा रामदेव सर कटवा देंगे। वित्त मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता अरुण जेटली को अपने बयान पर अमल करना चाहिए और इन् भड़काऊ भाषणों को देश विरोधी मानते हुए ऐसे नेताओं पर देश द्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए जैसे कन्हैया कुमार और उमर खालिद के साथ किया गया।

लेकिन बीजेपी की चुप्पी ऐसे नेताओं के प्रति नरम व्यवहार को दिखा रहा है और यह तक साबित करता है की अब इस देश में दो तरह के कानून चलते हैं। पहला तो बीजेपी या उसके समरथकों पर नरम है और दूसरा जो बीजेपी के खिलाफ बोलते हैं उनपर सख्त है।

सांसद सत्र के दौरान अपने बयान में जेटली ने सवाल उठाया था की "क्या हम उस विचारधारा को सम्मान तो नहीं दे रहे हैं जो देश को तोड़ने की है?" बेशक देश को तोड़ने वाली विचारधारा का सम्मान गलत है लेकिन सवाल यह है क्या सिर्फ "भारत माता की जय" न बोलने पर बाबा रामदेव और गिरिरा सिंह की धमकी देश को तोड़ने वाली विचारधारा नहीं है।

यह कोई नई बात नहीं है की जब बीजेपी सांसद या नेता भड़काऊ भाषण दे रहे हो लेकिन जब मुद्दा जेएनयू के छात्रों का था तो वित्त मंत्री ने फ़ौरन अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल खड़े किये थे लेकिन आज जब उनके नेता व समर्थक ऐसा करते हैं तो उनके मुंह पर ताला पड़ा हुआ है।