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Election commission

चुनावों में धर्म के इस्तेमाल पर केंद्रीय चुनाव आयोग सख्त हो गया है। पिछले दिनों भाजपा सांसद साक्षी महाराज के दिए एक बयान को प्रथम दृष्टया आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए आयोग ने उन्हें तो नोटिस जारी किया ही, लगे हाथ सभी राजनीतिक दलों को चेतावनी भी दे दी।

पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में सांप्रदायिकता के नाम पर वोटर्स को बांटना राजनीतिक पार्टियों भारी पड़ सकता है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि अगर कोई भी उम्मीदवार या प्रचारक सुप्रीम कोर्ट के आदेश या आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो आयोग चुप नहीं बैठेगा और सख्त कार्रवाई करेगा। मंगलवार को चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संबंध में एक पत्र भेजा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के नाम पर वोट मांगना गैरकानूनी बताया था।

चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों को याद दिलाया कि आचार सहिंता में पार्टियों को पहले ही कहा गया है “धर्म के नाम पर समाज के दो वर्गों के बीच समरसता खत्म करने वाले बयान देने बंद कर देने चाहिए।” सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आदर्श आचार संहिता और ज्यादा मजबूत हुई है। आयोग ने कहा कि यदि इसमें किसी भी प्रकार का उल्लंघन दिखाई पड़ता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि नए साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की संवैधानिक पीठ ने एक अहम फैसले में कहा था कि धर्म के नाम पर वोट मांगना गैरकानूनी होगा। फैसले में कहा गया कि कोई भी प्रत्याशी अगर धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के नाम पर वोट मांगता है तो वो गैरकानूनी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि भगवान और मनुष्य के बीच का रिश्ता व्यक्तिगत मामला है। कोई भी सरकार किसी एक धर्म के साथ विशेष व्यवहार नहीं कर सकती। ये फैसला हिंदुत्व से जुड़े एक केस की सुनवाई के दौरान लिया गया था।