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लंदन से प्रकाशित होने वाले दैनिक फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने साइमन केयर का एक स्तंभ प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने सऊदी अरब में बढ़ती बेरोजगारी का बारीकी से समीक्षा की है।

उन्होंने अहमद नामक एक टैक्सी ड्राइवर से मुलाकात की। अहमद ने सैकड़ों लोगों की तरह इससे पहले अमेरिका की ओर मुहाजरत की थी।

साइमन ने इस मुलाकात का जिक्र करते हुए लिखा: अहमद ने अमेरिका में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर उसने सऊदी अरब आने का फैसला किया। मगर सऊदी अरब में रोजगार न मिलने की वजह से उसने अवैध रूप से हवाई अड्डे पर ड्राइविंग शुरू कर दी। उसे हमेशा यह भय लगा रहता है कि अगर पुलिस को उसकी अवैध ड्राइविंग के बारे में खबर लग गई तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

30 वर्षीय अहमद का कहना है कि देश के आर्थिक हालात बहुत खराब हो गए हैं। कोई काम नहीं है। मेरे सब दोस्त सरकार को कोसते रहते हैं।

साइमन ने अपने स्तंभ में सऊदी अरब के एक सरकारी कर्मचारी के हवाले से लिखा है कि व्यापार करने वाले लोग अब सरकार पर भरोसा नहीं करते है क्योंकि सरकार अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को संभालने की क्षमता नहीं रखती। सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के कई विशेषाधिकार समाप्त कर दिए हैं। और यमन में सैन्य हस्तक्षेप ने सरकार के खर्च को और बढ़ा दिया हैं।

उक्त सऊदी नागरिक ने बताया कि सऊदी अरब में अब सुनहरा दौर खत्म हो चुका है। वर्तमान सऊदी सरकार के पास जनता को अच्छी खबर सुनाने के लिए कुछ भी नहीं है। अगर कोई खबर सुनाई देती है तो वह देश की अर्थव्यवस्था या युद्ध के बारे में है।

साइमन ने लिखा: जनता में सऊदी अर्थव्यवस्था को लेकर एक तरह की नाराज़गी दिखाई दे रही है। जिसकी वजह से सऊदी क्राउन प्रिंस के उत्तराधिकारी मुहम्मद बिन सलमान पर अधिक दबाव बढ़ रहा है। क्योंकि वे विजन 2030 के अंतर्गत प्रयास कर रहे हैं कि तेल पर निर्भरता से सऊदी अर्थव्यवस्था को निजात दिलाने और निजी क्षेत्रों में सऊदी जवानों को रोजगार प्रदान किया जाए।

हालांकि सऊदी जनता को विजन 2030 के महत्व का अनुमान है लेकिन तेल की गिरती हुई वैश्विक कीमत ने सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है जिसकी वजह से जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

एक सऊदी शिक्षक ने उक्त स्तंभकार को बताया कि उनकी मासिक वेतन का 7 प्रतिशत कम कर दिया गया है। उन्हें इस समय मासिक 1400 रियाल मिलते हैं। उनका कहना है कि यह कटौती घाटे और करों की वजह से हो रही है। सरकार 27 अरब डॉलर का बजट पूरा करने के लिए सरकारी कर्मचारियों पर दबाव डाल रही है।

साइमन ने लिखा कि मुहम्मद बिन सलमान ने ऐसे हालात में एक मनोरंजन नाव खरीदने के लिए 500 मिलियन यूरो खर्च किए थे। सऊदी शहजादे की इनही अय्याशियों की वजह से सऊदी जनता में नाराज़गी पैदा हो रही है।

फ़ाइनीनशियल टाइम्स ने लिखा: सऊदी व्यापारियों की एक बड़ी संख्या में देश के आर्थिक हालात के डर से अरबों डालर विदेशी स्थानांतरित कर दिए हैं।