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फ्रांस के एक स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति ने वैज्ञानिकों को आश्चर्य में डाल दिया है क्योंकि उसके मस्तिष्क का 90 प्रतिशत हिस्सा बुरी तरह तबाह हो चुका है लेकिन वह एक समय तक इससे अज्ञात रहा और अब भी स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहा है।

फ्रांस के उस व्यक्ति के नाम और पहचान का कुछ कारणो से खुलासा नहीं किया गया है लेकिन इस स्थिति ने चिकित्सा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है और वह चेतना और दिमाग  की नई परिभाषा पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं (नीरोनज़) का एक विशाल संग्रह हमें अपने होने का एहसास दिलाता है जिसे '' चेतना जाति '' कहा जाता है, एक ही चेतना से हमारे व्यक्तित्व बनता है और हम अपने आस-पास व वातावरण को पहचानते हैं।

इस व्यक्ति का उल्लेख पहली बार 2007 में चिकित्सा पत्रिका लैंसट में किया गया और आज 10 साल बाद भी उसका जीवित और स्वस्थ रहना एक रहस्य बना हुआ है। 44 वर्षीय इस व्यक्ति ने अपनी बाएं पैर में मामूली कमजोरी के अलावा किसी और स्थिति की शिकायत नहीं की है लेकिन उसके मस्तिष्क स्कैन से पता चला है कि इसका पूरा जहन एक प्रकार के तरल से भरा है जिसके ऊपर बाहरी दिमाग की एक पतली तह चढ़ी हुई है जबकि मस्तिष्क का खासा बड़ा आंतरिक हिस्सा गायब हो चुका है।

डॉक्टरों का मानना ​​है कि इस व्यक्ति का दिमाग मे तरल भरने से 30 साल की उम्र में समाप्त हो जाना चाहिए था जिसे '' हाईडरोसीफ़ालस '' कहा जाता है। यह व्यक्ति बचपन में इस रोग का शिकार हुआ था जिसके बाद खोपड़ी में एक स्टंट लगाया गया जिसे 14 साल की उम्र में निकाल दिया गया था। तब से अब तक उसके दिमाग का बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे घुल कर समाप्त हो चुका है।

मानसिक रूप यह व्यक्ति विकलांग नहीं हालांकि उसका आई क्यू 75 है जो कम तो है लेकिन वह सरकारी कर्मचारी है और दो बच्चों और पत्नी के साथ सुखद जीवन गुज़ार रहा है। ऊपर चित्र में अपने दिमाग का स्कैन है जिसमे भेजे का बड़ा हिस्सा गायब है जबकि काला हिस्सा तरल से भरा है।

अगर हम '' चेतना 'की प्रचलित परिभाषा की बात करे तो आज उसे चेतना से खाली होना चाहिए था क्योंकि मानसिक रचनाएँ' 'कलासटरम' 'ही चेतना का गठन करता है और वह उसके दिमाग से गायब है। एक मनोचिकित्सक के अनुसार इस अजीब घटना के बाद हमें 'चेतना' की नई परिभाषा करनी होगी, मनोवैज्ञानिक का कहना है कि शायद मानव चेतना के बिना जन्म लेता है और सारी उम्र चेतना बनती रहती है चाहे मानसिक कोशिकाऐ कम हो या ज्यादा।

लेकिन फ्रांसीसी व्यक्ति पर हाल के शोध के बाद एक नई बात सामने आई है। विशेषज्ञों के एक वर्ग का कहना है कि इस व्यक्ति का दिमाग घुलकर खत्म नहीं हुआ बल्कि तरल पदार्थ के दबाव से सिकुड़ गया है और इसलिए यह अभी भी सामान्य है।