समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में सीट के बटवारे की सहमति नज़र आने लगी

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन की औपचारिक घोषणा भले ही अभी न हुई हो लेकिन दोनों के बीच सीट के बटवारे की सहमति नज़र आने लगी सूत्रों के अनुसार सपा 300 और कांग्रेस 103 सीटों पर अपने अपने प्रत्याशियों को उतारेगी।

सपा कांग्रेस और रालोद गठबंधन में छोटे दलों , निर्दलयों को पंजा के निशान पर लड़ने की तयारी

उत्तर प्रदेश में बिहार की तर्ज़ पर किसी तरह से बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने के लिए सपा, कांग्रेस और राष्ट्रिय लोकदल के साथ ही कुछ निर्दलीय और छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन की रूप रेखा पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। अब सिर्फ इसकी घोषणा बाकी है जो कल किसी भी वक़्त की जा सकती है।

मुलायम के दांव से सभी हो गए चित

समाजवादी मुखिया मुलायम सिंह यादव को जो लोग जानते हैं वो बता सकते हैं की मुलायम सिंह यादव किस तरह राजनीति में आने से पहले अखाड़े बाज़ी करते थे वो खुद कई बार अपने दांव पेच की चर्चा पत्रकारों से कर चुके हैं। जिनमे चरखा दांव धोबीपाट दांव को विशेष कर बताया करते थे।

सपा-बसपा में सेंधमारी कर क्या मजबूत हो पाएगी भाजपा

राजनीतिक शुचिता और सिद्धांतों का दम भरने वाली भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की सत्ता हासिल करने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। दूसरे दलों पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए भाजपा न सिर्फ समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में सेंधमारी कर रही है, बल्कि पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं को टिकट दे उपकृत भी कर रही है। सुबह भाजपा का दामन थाम शाम को पार्टी का टिकट पाने वाले नेताओं से पार्टी कार्यकर्ता और नेताओं में रोष उत्पन्न होने लगा है।

ट्रम्प की विदेश नीतियों के समक्ष पाकिस्तान की लड़खड़ाती स्थिति

ओबामा के आठ वर्षीय राष्ट्रपति दौर में पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों ने बहुत अधिक उतार चढ़ाव देखे। इन उतार चढ़ावों में से कुछ का कारण अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा नीतियों को जाना जा सकता है तथा पाकिस्तान का अफ़ग़ानिस्तानी धरती पर अशांति फैलाने और संचालन कार्यान्वयन के लिए तालिबानी और शब्का हक्कानी आतंकवादियों की बहुपक्षीय वित्तीय, प्रशिक्षण और लोजिस्टिकल सहायता करना भी जाना जा सकता है जिसके कारण कुछ हज़ार अमेरिकी और नाटो सैनिकों की हत्या भी हुई।

राज्यसभा चुनाव से ही शुरू हो गयी थी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की नज़दीकी

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच दोस्ती की शुरूआत प्रमोद तिवारी के राज्य सभा चुनाव से हुई और यह दोस्ती उत्तप्रदेश का चार्ज सँभालते ही ग़ुलाम नबी आज़ाद के दौर में बढ़ती हुई राज्यसभा के लिए कपिल सिब्बल और विधान परिषद के लिए दीपक सिंह की जीत सुनिश्चित कराने  में सपा के समर्थन से परवान चढ़ी।

उच्च वर्ग समाजवादी पार्टी के साथ क्यों नहीं?

सम्पूर्ण भारत की राजनीति में जातिगत और सांप्रदायिक प्रभाव देखने को मिलता है मगर उत्तर प्रदेश की राजनीति खास तौर पर जातिगत आंकड़ों के इर्द-गिर्द ही घूमती है। जातिगत आंकड़ों पर गौर फरमाया जाए तो सत्ता धारी समाजवादी पार्टी का मजबूत वोट बैंक यादव और मुस्लिम वर्ग माना जाता है,आखिर प्रदेश का उच्च वर्ग सपा का साथ क्यों नहीं देता है? कारण - पाखण्ड ? इसका क्रमिक अध्ययन जरुरी है। पाखण्ड क्या है ,इसकी असलियत से हर भारतवासी चिरपरिचित है।

अखिलेश की साइकिल पर गठबंधन कर सवार होने को तैयार रालोद और कांग्रेस

चुनाव आयोग के समाजवादी पार्टी और साइकिल पर अखिलेश यादव के अधिकार पर मोहर के साथ ही गठबंधन की सरगर्मियां तेज हो गयीं। अखिलेश यादव से गठबंधन के जरिए सरकार में वापसी की उम्मीद लगाए बैठे कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के दो बड़े नेताओं के बीच लम्बी बातचीत की भी सूचना मिली है।