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BCCI president Anurag Thakur

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई के अध्‍यक्ष पद से हटा दिया है। साथ ही अजय शिर्के को सचिव पद से हटाने के निर्देश दिए हैं। अनुराग पर आरोप था कि उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला और सुधार प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि ठाकुर ने इन आरोपों से इंकार किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के संचालन के लिए नए अधिकारियों की तलाश के लिए फली नरीमन और वरिष्‍ठ वकील गोपाल सुब्रमण्‍यम को एमिकस क्‍यूरी नियुक्‍त किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 70 साल से ज्‍यादा उम्र के अधिकारी बीसीसीआर्इ में ना हो। 18 जुलाई 2016 के आदेश के तहत दोनों अधिकारियों को हटाया जाता है। कोर्ट ने अनुराग ठाकुर से पूछा कि आप पर क्‍यों ना केस चलाया जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी।

कोर्ट ने यह फैसला लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों पर अमल ना करने के चलते उठाया है। लोढ़ा कमिटी ने पिछले साल बीसीसीआई में सुधार की रिपोर्ट दी थी। लेकिन एक साल बाद भी इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट ने यह कदम उठाया है। बीसीसीआर्इ को तीन मुद्दों कूलिंग ऑफ पीरीयड, अधिकारियों की उम्र व कार्यकाल और एक राज्‍य एक वोट पर ऐतराज था। बीसीसीआई में सुधार के लिए जनवरी 2015 में लोढ़ा कमिटी का गठन किया गया था। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जस्टिस आरएम लोढ़ा ने कहा कि यह तो होना ही था और अब यह हो गया। सुप्रीम कोर्ट के सामने तीन रिपोर्ट सबमिट की थी, उस समय भी इसे लागू नहीं किया गया। एक बार जब सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी की सिफारिशों को अपना लिया तो उसे लागू किया जाना था। यह तर्कपूर्ण फैसला है। सबको यह बात समझ लेनी चाहिए कि एक बार जब सुप्रीम कोर्ट आदेश पास कर देता है तो उसे मानना चाहिए। यह क्रिकेट की जीत है और यह आगे बढ़ेगा। प्रशासक आते जाते रहते हैं लेकिन यह खेल के फायदे के लिए है। पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी ने इस फैसले पर कहा कि यह भारतीय खेलों के लिए अच्‍छा है और विशेष रूप से क्रिकेट के लिए।