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सुप्रीम कोर्ट आॅफ इंडिया ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के संचालन में अनियमितता को लेकर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने में असफल बीसीसीआई वर्तमान प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को उनके पदों से हटा देने के बाद बीसीसीआई के अध्यक्ष पद को लेकर कई नामों की चर्चा है।बीसीसीआई अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का नाम सबसे आगे चल रहा है।

भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक सौरव गांगुली को उनकी नेतृत्व क्षमता के लिए जाना जाता है। सौरव दादा अपनी कप्तानी के दिनों से ही टीम मैनेजमेंट की अपनी अद्भुत कला का प्रदर्शन करते आ रहे हैं। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान रहते हुए अपनी जबरदस्त नेतुत्व क्षमता का परिचय दिया। गांगुली वर्तमान में बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और अपने राज्य में क्रिकेट के लिए प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं। जिसके कारण उनका नाम कुशल क्रिकेट प्रशासकों में शुमार किया जाता है। बीसीसीआई ने भी समय समय पर गांगुली को अमह जिम्मेदारी दी है जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है।

कप्तान रहते हुए 'दादा' के नाम से मशहूर गांगुली ने कई बेबाक फैसले लिए और टीम में जीवटता भरी। अगर गांगुली बीसीसीआई के अगले अध्यक्ष बनते हैं तो क्रिकेट जगत को इस पर हैरत नहीं होगी, क्योंकि गांगूली ने बतौर क्रिकेट प्रशासक खुद को साबित किया है।  इंग्लैंड और भारत के बीच तीन वनडे मैचों की सीरीज के शुरू होने में ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। उम्मीद है नए अध्यक्ष का फैसला 15 जनवरी से शुरू हो रहे भारत-इंग्लैंड वनडे सीरीज से पहले हो जाएगा।

बोर्ड को नियमों के मुताबिक़ अपने पांच सबसे सीनियर और योग्य वाइस प्रेसिडेंट को नए अध्यक्ष के तौर पर नामित करना है।बीसीसीआई प्रेसिडेंट की रेस में सौरव के अलावा जो नाम हैं उनमें, वेस्ट जोन के वाइस प्रेसिडेंट टी।सी मैथ्यू, गौतम रॉय प्रमुखता से शामिल हैं। इसमें डीडीसीए के अफसर और तीन बार वाइस प्रेसिडेंट रहे सीके खन्ना सबसे सीनियर हैं। हालांकि खन्ना के नाम पर कुछ आपत्तियां भी हैं। कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव ब्रिजेश पटेल के नाम को लेकर भी चर्चा है। इनके आलावा शिवपाल यादव के नाम को लेकर भी अटकलें लगाईं जा रही हैं। शिवपाल यादव को एक साल पहले एन श्रीनिवासन के पद छोड़ने के बाद बीसीसीआई का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अन्य नामों पर भी कुछ तकनीकी आपत्तियां हैं। नियमों के मुताबिक़ सौरव वाइस प्रेसिडेंट तो नहीं हैं लेकिन बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन में अधिकारी के तौर पर वे तीन साल का कार्यकाल पूरा करने वाले हैं। सुनील गावस्कर ने भी उनके अप्वाइंटमेंट की वकालत की है।

दादा के नाम से मशहूर गांगुली की लोकप्रियता भी लाजवाब है। अगर सौरव गांगुली की इस पद पर नियुक्ति होती है तो वह 1928 में स्थापित बीसीसीआई के 38वें अध्यक्ष होंगे। झारखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख और बीसीसीआई के वर्तमान संयुक्त सचिव अमिताभ चौधरी का अजय शिर्के का स्थान लेना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में सौरभ दादा के नेतृत्व में भारत का क्रिकेट बोर्ड ओर क्रिकेट का भविष्य नित नयी उचाई की ओर जायेगा इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है।

बता दे कि सोमवार को मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक बीसीसीआई की कार्यप्रणाली प्रशासकों की एक समिति देखेगी। कोर्ट ने एमिकस क्यूरी के रूप में कोर्ट की मदद कर रहे वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन और गोपाल सुब्रमण्यम से समिति के लिए नाम चयन करने में कोर्ट की मदद करने को कहा है।