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भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) ने घोटालों के आरोपी सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को अपना आजीवन मानद अध्यक्ष बनाने के फैसले को वापस ले लिया है और साथ ही अपने इस फैसले के लिए माफी भी मांगी है।

खेल मंत्री को नौ जनवरी को लिखे एक पत्र में आईओए के अध्यक्ष एन.रामचन्द्रन ने कहा कि आईओए ने इन दोनों को सम्मानित करने के लिए कोई प्रस्ताव पास नहीं किया है।

खेल सचिव इंजेती श्रीनिवास को लिखे पत्र में रामचन्द्रन ने कहा, "चेन्नई में 27 दिसंबर 2016 को हुई वार्षिक आम बैठक के अंत में यह मुद्दा उठाया गया था कि आईओए को दो अजीवन अध्यक्ष नामित करने चाहिए।"

उन्होंने लिखा, "संविधान के मुताबिक सात दिन के अंदर किसी तरह का कोई नोटिस मिला नहीं इसलिए कोई प्रस्ताव रखा नहीं गया था न ही पास किया गया था।"

रामचन्द्रन ने कहा कि सदस्य बैठक में प्रस्ताव रख सकते हैं लेकिन अगर वह संविधान के मुताबिक नहीं होगा तो यह नहीं माना जाएगा की प्रस्ताव पास हुआ है।

रामचन्द्रन ने कहा, "ऊपर रखे गए विचार को देखते हुए, चूंकि प्रस्ताव संविधान के मुताबिक नहीं था इसलिए इस कारण जिन लोगों और आईओए के सदस्यों को जो शर्मिदगी हुई है उसके लिए हमें पछतावा है।"

आईओए द्वारा कलमाड़ी और चौटाला को अजीवन अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कई लोगों ने इसकी आलोचना की थी। खेल मंत्रालय ने आईओए को इसके लिए कारण बताओ नोटिस भी भेजा था और उसकी मान्यता भी रद्द कर दी थी।

आईओए के इस फैसले का खेल मंत्री विजय गोयल ने स्वागत किया है।

गोयल ने कहा है, "मैंने मीडिया में आ रहीं खबरों को देखा कि आईओए ने सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को अजीवन अध्यक्ष पद से हटा दिया है। मैं खुश हूं कि आईओए ने अपने फैसले में बदलाव किया है।"

कलमाड़ी 1996 से 2011 तक आईओए के अध्यक्ष रह चुके हैं। 2010 में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में हुए घोटालों में वह आरोपी हैं। वहीं चौटाला पर कई आपराधिक मामला दर्ज हैं।